बार बार करने वाला सवाल  
 
 

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* एफ ए क्यू

1.

क्या तुड़ाई के तुरंत बाद नारियल बोए जा सकते हैं?

उत्तर

:लंबी प्रजाति के बीजफल बोने के पहले इसके छिलके सूखने दें। लंबी प्रजाति के बीजफल बोने के पहले इसके छिलके सूखने दें । बुआई के एक माह पहले छाया में बीजफलों का भंडारण करें ताकि जल्द एवं अधिकतम अंकुरण संभव हो: तुड़ाई के सके। लेकिन बौने बीजफलों के मामले में देरी न करें । बोने बीज फल में जल की मात्रा  कम है और जल्द ही सूख जाता है। अत कुछ ही दिनों में छिलका सूखते ही बौने बीजफल बोएं।

   
2.

2.                    लंबी X बौनी एवं बौनी X लंबी संकर किस्मों में क्या अंतर है?

उत्तर:

     लंबी X बौनी एवं बौनी X लंबी संकर किस्में में अंतर उप जातीय संकर वर्ग की हैं। लंबी X बौनी संकर किस्मों में लंबी किस्म माता वृक्ष और बौनी किस्म नर वृक्ष है बौनी X लंबी किस्म में बौनी किस्म माता वृक्ष और लंबी किस्म वृक्ष है।  

 

   
3.

2.                    क्या नारियल पेड़ से ताड़ी निकालने से पेड़ की पैदावार बढ़ जाती है?

उत्तर

      बताया जाता है कि कम पैदवारवाले पेड़ों के विषय में छोटी अवधि के लिए ताड़ी निकालने से पैदावार में थोड़ी-सी वृद्धि आ जाती है।

 

   
4.

2.                    नारियल बाग में नारियल छिलके का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर

नारियल बाग में नारियल छिलके का उपयोग दो तरीके से किया जा सकता है।

(i)           छिलका गाड़ना- मिट्टी में गाड़ा हुआ छिलका जल भंडार का कार्य करता है और पेड़ों को उसमें छोटी मात्रा में निहित पोटैश की पूर्ति भी करता है। पूर्ण रूप से तर-ब-तर छिलके में अपने वज़न के करीब 6-8 गुना पानी धारण करने की क्षमता है जल अभाव के अवसर पर पेड़ों को यह नमी प्राप्त हो जाती है। इसके अलावा  100000 छिलके में औसतन 1 टन म्यूरियेट ऑफ पोटैश के बराबर पोटैश अंतर्निहित है जिसकी पूर्ति पेड़ों को होती है। छिलका प्राय: वर्षा ऋतु के प्रारंभ में पेड़ों की कतारों के बीच 1.5 से 2 मीटर तक चौड़ी और करीब  0.3 से 0.5 मीटर तक गहरी रेखीय खाइयों में गाड़ दिया जाता है। खाई में छिलकों का प्रबंध परतों में किया जाता है इसमें अवतल स्पंजी नीचे और ऊपर की ओर अभिमुख होते हुए छिलका गाड़ना है। प्रत्येक परत मिट्टी से ढके जाते है और  यह प्रक्रिया अंतिम परत भूमि स्तर से 0.2 नीचे पहुँचने तक जारी रखना है।    उसके बाद खाई भरा देती है और मृदा कार्य पूरा हो जाता है। प्राय: इसके लिए प्रति पेड़ को 1000 छिलके की आवश्यकता है। उपर्युक्त कार्य से प्राप्त सुधार केवल 5 से 6 वर्षों तक रहेगा। यह प्रक्रिया 6 वर्षों के बाद दुहराना चाहिए। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पेड़ का आम तौर पर सुधार और पत्तों एवं उपज की संख्या में वृद्धि है।   

(ii)      यद्यपि उपज में प्रथम 2 वर्षों में प्रत्यक्ष वृद्धि नहीं होगी फिर भी अनुप्रयोग के तृतीय वर्ष से वास्तविक लाभ प्रकट हो जाएगा।  

(iii)  छिलकों से सतह का पलवार : नारियल पेड़ के थाले के चारों ओर सतह पलेवार के रूप में भी छिलकों का उफयोग किया जाता है।  

(iv)      वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए छिलका : नारियल छिलका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाए तो कयर एवं कयर उत्पादों के उत्पादन के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।  

   
5.

2.                    नारियल में मातृ वृक्ष चयन करने के लिए निर्धारित मानदण्ड क्या क्या है?

उत्तर

अच्छी गुणवत्ता वाली बीज फलों की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त पेड़ का चयन मातृ वृक्ष के रूप में किया जाना चाहिए।

  •        20 वर्ष या उससे अधिक आयु का

                     साधारणत: नियमित रूप से प्रतिवर्ष प्रति पेड़ 80 नारियल से अधिक पैदावार देनेवाले पेड़ का चयन होगा। फिर भी, तमिलनाडु एवं कर्नाटक के मामले में बीजफलों की प्राप्ति के लिए प्रतिवर्ष प्रति पेड़ कमा से कम 100 नारियल के उच्च पैदवाल वाले पेड़ों का चयन करना चाहिए।

                     रोगमुक्त

                     मध्यम आकार के नारियल का चयन करें जिसमें छिलके युक्त नारियल का औसत वज़न 600 ग्राम हो और खोपड़े का वज़न 150 ग्राम हो।

                     कम से कम 30 पूर्ण रूप से खुले पत्ते वाले नारियल पेड़ का चयन करें जिसमें सभी दिशाओं की ओर पत्ती विन्यास हो।

                     छोटे और मज़बूत पर्णवृत वाले नारियल का चयन करें जिसमें तने से अच्छी तरह टिक रहे चौड़ा पत्ती थाला हो।

                     गुच्छे डंठल छोटा, पक्का और मज़बूत होना चाहिए जिसमें पतन या झुकने की प्रवृत्ति नहीं हो।

                     ऐसे पेड़ों का चयन न करें जिनमें बंध्याफल होते हैं, जिनकी बड़ी संखया में कच्चे फल गिरने की प्रकृति हो। जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो। अत्यधिक अनुकूल दशा में रहने वाले/वैकल्पिक फलन प्रवृत्ति दर्शानेवाले पेड़ों को छोड़ना चाहिए।  

   
6.

2.                    नारियल के बीजफलों का संग्रह करने का समय कब है?

उत्तर

केरल के मामले में जनवरी से अप्रैल तक की अवधि के दौरान बीजफलों का संग्रह किया जा सकता है। कर्नाटक और आँध्र प्रदेश में यह अक्तूबर से मार्च और तमिलनाडु में मार्च से अगस्त और केरल के मामले में जनवरी से अप्रैल तक की अवधि के दौरान बीजफलों का संग्रह किया जा सकता है। कर्नाटक और आँध्र प्रदेश में यह अक्तूबर से मार्च और तमिलनाडु में मार्च से अगस्त और उड़ीशा, असम में अगस्त से सितंबर और पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में दक्षिणी राज्यों की दशा में।    

 

   
7.

क्या नारियल बाग में जैव खाद के रूप में कयर गूदे का उपयोग किया जा सकता है।

उत्तर

जैव खाद के रूप में कयर गूदे का उपयोग करने के पहले इसका कंपोस्ट करना है क्योंकि इसमें   थोड़ी मात्रा में नाइट्रजन और कच्चे रूप में लिग्निन और पॉली फीनॉल बड़ी मात्रा में निहित है।  एक टन    कयर गूदे का कंपोस्ट करने के लिए 5 किलो ग्राम यूरिया एवं प्लूरोटस फँफूदी अपेक्षित है।

   

8.(i)

Whether growing pepper on coconut will adversely affect the growth of coconut palm? 

Ans.

No. The pepper is a commercially viable crop in the mixed cropping system under coconut.

   

8.(ii)

Distance to be maintained while planting pepper vines in the basins?

Ans.

The pepper vines are to be planted in pits taken at a distance of 1 to 1.5 Meter away from the trunk at the North-Eastern side of the palm.

   
9.

Clarify the following points regarding intercropping in coconut ?

a)

Whether intercropping can be practiced in coconut garden during all the stages of its growth ?

Ans.

Intercropping in the coconut garden has to be done based on the availability of sunlight. in the holdings. During the initial 8 years, there is a good light transmission and annual / biennial crops can be raised as intercrops. During the period of 9 to 25 years of growth, light availability is poor and hence not suitable for growing intercrops. In a garden, where the palms are more than 25 years, there will be gradual increase in light availability and hence ideal for raising annual and perennial crops in the inter space.

   
b)

Suggest few annual / biennial crops that can be raised as intercrops in coconut garden ?

Ans.

  1. Tuber crops - Tapioca, elephant foot yam, sweet potato, colocasia, greater yam, lesser yam,
  2. Spices - Ginger and turmeric,
  3. Cereals - Rice, Maze, finger millet, pearl millet.
  4. Vegetables- Chilly, potato.
  5. Pulses- Cowpea, black gram, green gram,
  6. Fruit crops-Banana and pineapple
  7. Flower crops - Orchid, anthurium
  8. Medicinal and aromatic plant - Lemon grass , Kacholam, Diascorea, Arrowroot, Sida, long pepper, Neelaamari, Adapathiyan.
   
c)

Suggest few perennial crops that can be grown as mixed crops in coconut garden ?

Ans.

Cocoa, Clove, nutmeg, cinnamon, pepper, Betel vine.

   
10 a.

What are the techniques for raising coconut nursery?

Ans.
  1. The site for raising coconut nursery should have well drained, light textured soil with adequate shade, no need of too much shade. In the open area provide shade during the summer. Adequate water source has to be ensured.
  2. The seednuts are to be sown in the nursery bed of size 1.5 meter width and convenient length at a spacing of 30 cm (between rows) x 30 cm (between nuts) in 4-5 rows per bed
  3. Prepare raised beds if water stagnation are problem during rainy season.
  4. The seednuts are to be planted either horizontally with the widest of the segment at the top or vertically with the stalk end up. 
    However, horizontal planting is more preferred considering early and higher germination of seedlings with good vigour and growth. Vertical planting is preferable on account of convenience in transportation and lesser risk of injury of seedlings during lifting from nursery.
  5. Irrigate once or twice in a week if there is no rain.
  6. Remove the nuts which have not sprouted even after five months of sowing.
   
10 b.

How much quantity of fertilizers should be applied to an adult coconut palm ?

Ans.

General fertilizer doze recommended for an adult coconut palm is 500 gm. N, 320 gm. P2 05 and 1200 g K2 O per palm per year.
In the first year after planting, one tenth of the recommended doze should be applied 3 months after planting. In the second year and third year 1/3rd and 2/3rd of the recommended dozes respectively should be applied in two equal splits. From the fourth year onwards full doze of fertilizers should be provided.

 

 

10 c.

Whether skipping of phosphatic fertilizers can be done ?

Ans.

When the available phosphorus in the soil is more than 20 ppm, application of phosphatic fertlisers can be skipped off for a few years until the level goes below 20 ppm. If the level is between 10 to 20 ppm, half of the recommended P2 O5 can be applied.

 

 

11.

What are the causes of root (wilt) disease and give the recommended control measures ?

Ans.

Root wilt disease of coconut is caused by a micro organism called phytoplasma. The disease is transmitted by lace bug Stephanities typicus and plant hopper Proutista moesta. No definite control measure has been developed so far. The bearing palms in the early and middle stages of the disease respond well for the management practices and the yield of those palms could be maintained at economic level by the adoption of disease management practices. The following management practices are recommended.

  1. Apply fertilizers ( 1kg. urea, 2 kg super phosphate, 2 kg muriate of potash and 3 kg magnesium sulphate per palm per year) in two splits. 1/3rd. dose is to be applied during April-May and 2/3rd during September-October for rain fed palms and four equal splits for irrigated palms.
  2. Control leaf rot disease which is found super imposed in the root wilt diseased palms by adopting the following measures.
    1. Cut and remove the rotten portion of the spindle leaf and two successive leaves.
    2. Mix hexaconazole (contaf 5 EC) @ 2ml per palm or dithane M45 @ 3 g per palm in 300 ml of water. Pour this solution around the base of the spindle.
    3. Apply Phorate 10 G, 20g mixed with 200 g. sand, in the inner most leaf axils, twice a year preferably before the onset of monsoon i.e., May-June and after monsoon i.e. September-October.
  3. Apply neem cake @ 5 kg. per palm per year.
  4. Irrigate the palm during summer months.
  5. Provide drainage wherever found necessary.
  6. Grow green manure crops in the basin during monsoon and later incorporate into the basin during September-October.
  7. Raise intercrops in rotation by adopting mixed cropping/mixed farming systems with recycling of organic matter.
  8. Remove all disease advanced and uneconomic palms, and replant with healthy elite seedlings if the planting density is less then 175 seedlings per hectare. 
    Development of resistant / tolerant variety is an ideal solution to this malady. Breeding for resistance / tolerance to root wilt disease initiated in 1987-88 at CPCRI, Kayangulam is showing encouraging results and indicate the possibility of evolving resistant / tolerant high yielding CDG x WCT hybrids for combating the root wilt disease.
   
12.

What is the symptom of red palm weevil attack and give effective measures for controlling the pest ?

Ans.

Red palm weevil is a major pest of coconut which if not controlled in the early stages can kill the palms. The attack of red palm weevil is more severe in young palms below 15 years. The pest can cause damage to the crown and stem portion close to the crown region. The bole region of the seedling is also damaged by its infestation.

The symptom of the red palm weevil infestation becomes very clear only in advanced stage by which time the crown of the affected palms topples. On close monitoring it can be seen that the infested palms in the early stage show yellowing and later wilting of leaves of inner and middle whorls. Small circular holes can be seen on the trunk with a brownish viscous fluid oozing out from them. The base of the affected leaves sometimes split and extrusion of fibres is seen from the cracks. The presence of chewed up fibres / cocoons etc. in leaf axil indicates the presence of the pest in the palm. Gnawing and nibbling sound produced by the grub inside while feeding is audible in many cases.

The pest attack can occur throughout the year but the outbreak is serious after Southwest monsoon. For the management of the red palm weevil an integrated approach of all the recommended methods is essential. This includes:

  1. Sanitation and cultural methods - Crown of the palm has to be cleaned periodically to prevent decaying of organic debris in leaf axils. As far as possible avoid making any cuts causing injuries to the stem of palms. When fronds are to be removed from the palms it should be cut by leaving a petiole length of about 120 cm.
  2. Insecticidal treatment - The affected palms in early stages of attack could be saved by injecting 0.1 per cent endosulfan / dichlorvos or 1 per cent carbary1. Depending on the intensity of pest infestation 1000-1500 ml insecticide in suspension may be required for one palm. In the case of crown damage, the damaged tissues have to be removed and insecticides suspension may be poured in. When pest entry is through the trunk all the holes in the stem may be plugged with cement or plaster.

    As a prophylactic measure fill the top 2-3 leaf axils with a mixture of Sevidol 8G (25 gm) + fine sand (200 gm) per palm during May, September and December.

  3. Attract the pest and destroy them
  4. Filling of top leaf axils with neem cake was also found to be effective in dispelling the pest to a great extent.
   
13.

Give the following details about pheromone traps ?

13 (i).

Height of the traps ?

Ans.

(i) Placing of the trap at a height of 1 to 1.5 metre above the ground level.

   
13 (ii).

Interval for replacing the food based insecticide solution ?

Ans.

The traps are to be checked once in10 days for replacing the food bait and insecticidal solution.

   
13 (iii).

Maximum longevity of the trap ?

Ans.

During winter the longevity of the trap will be about 5 months and in summer it gets exhausted in 3 months.

   
13 (iv).

Whether it is necessary to continue the system once the infestation of beetles is reduced ?

Ans.

The pheromone strip (sachet) may be removed in that case and may be kept in the refrigerator after putting it in a container for subsequent use.

   
14.

How can we control the Eriophyid mite of coconut without disturbing beneficial insets ?

Ans.

In order to protect the natural enemies of the mite present in the coconut gardens, avoid too much use of plant protection chemicals and use them as the last resort. Use plant protection chemicals at the correct dose and spray to cover the buttons / nuts of 2-6 months only. Organic insecticides like neem oil garlic emulsion and neem based commercial products which are not harmful to the natural enemies can be sprayed.

   
15.

Is there any disease in coconut that spreads through irrigation water? Give remedial measures ?

Ans.

Thanjavur wilt / Ganoderma wilt is the disease spreading through Irrigation water. Characteristic symptom of the disease is rotting of the basal portion of the coconut stem. 
In order to check the spreading of the disease, following management practices may be adopted such as

  1. Application of organic manures @ 50 kg. per palm
  2. Application of neem cake @ 5 kg. per palm per year
  3. Drench the basis with 40 litres of 1% Bordeaux mixture to soak the soil up to 15 cm. depth at quarterly intervals.
  4. Avoiding flood irrigation
  5. Application of sulphur and lime to the soil around the stem
  6. To destroy unproductive and severely affected palms along with the bole and roots.
   
16.

In order to prevent immature nut fall in coconut whether the application of Bordeaux mixture will help, if yes, indicate.
(ii) Quantity of mixture
(iii) Whether spraying can be done at the time of opening of inflorescence
(iv) Best time of spraying

Ans.

Yes, in case nut fall is due to the attack of fungus, it can be controlled by spraying Bordeaux mixture (1%). Fungal attack is general observed during monsoon. Control measures:

  1. 2-3 ltrs. of 1% Bordeaux mixture per palm ( 1 ltr. of 1% Bordeaux mixture :- 10 gram powdered copper sulphate & 10 gram quick lime separately dissolved in 500 ml. water and then mixed together.)
  2. Spraying should not be done immediately after the opening of the inflorescence, as pollination will be affected.
  3. Before and after monsoon, one or two sprays at an interval of 40 days.

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